Saturday, July 3, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)

 👉इस लेख में हम भारत में मध्यस्थ बैंक की शुरुआत, उसका राष्ट्रीयकरण, प्रतिक, RBI के क्षेत्रीय कार्यालय एवं शाखाए,RBI की संरचना, RBI के गवर्नर, गवर्नर की नियुक्ति,कार्यकाल एवं आरबीआई के कार्यों के बारे में जानें गै।


✍️भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। एवं भारत के सभी बैंकों का संचालक और रिजर्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्तित करता है।

✍️शरुआत में यह एक प्राइवेट बैंक चार्जेस का राष्ट्रीयकरण भारत सरकार द्वारा सन् 1949 में किया गया जिसके बाद यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व वाली बैंक बन गई।

✍️मुद्रा की छपाई के मामले में भारत में RBI का एकाधिकार है। (1₹ की नॉट और सिक्के को छोड़कर जिसकी छपाई भारत सरकार के पास है)


भारत में मध्यस्थ बैंक की शुरुआत

👉भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उत्पन्न हुई आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए किया गया था।

👉सन 1920 में हिल्टन यंग कमिशन ( Hilton young Commission) (जिसे रॉयल कमिशन के नाम से भी जाना जाता है) बनाई गया । यह देश में एक मध्यस्थ बैंक की स्थापना के लिए बनाया गया था बाद में सन 1926 में यह मंडल ने एक रिपोर्ट दिया इसकी सिफारिशें इंग्लैंड में RBI ACT–1934 पास हुआ।

👉और 1 अप्रैल 1935 को RBI की स्थापना की गई एवं इसके प्रथम गवर्नर के रूप में ऑस्वॉर्न स्मिथ (1935–37)को रखा गया। और उसके बाद प्रथम भारतीय गवर्नर C.D देशमुख (1943–45) थे।

👉RBI की स्थापना में डॉ.भीमराव अंबेडकर जी ने अहमद भूमिका निभाई है उनके द्वारा प्रदान किए गए दिशा-निर्देशों या निर्देशक सिद्धांत के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक बनाई गई थी।

👉RBI के दिशा–निर्देश कार्यप्रणाली एवं दृष्टिकोण डॉ.बी.आर अंबेडकर की पुस्तक "the problem of the rupee, its original and its solution"की अवधारणाओं पर आधारित थी।


RBI का राष्ट्रीयकरण

प्रारंभ में RBI एक प्राइवेट बैंक थी। जिसकी शुरुआत 5 करोड़ के मुड़ीरोकाण से हुई थी और यहां पूंजी प्राइवेट शेरहोल्डर द्वारा लगाई गई थी।

देश की आजादी के बाद 1 जनवरी 1949 में RBI का राष्ट्रीयकरण हुआ। उस समय RBI के गवर्नर C.D देशमुख थे।


प्रतीक 

RBI के प्रतीक में ताड़का वृक्ष एवं बंगाली बाघ रखा गया है।


RBI के क्षेत्रीय कार्यालय एवं शाखाएं

भारतीय रिजर्व बैंक के 4 क्षेत्रीय कार्यालय,27 स्थानिक कार्यालय एवं 4 उप कार्यालय हैं।

RBI के 4 क्षेत्रीयकार्यालय भारत के चारों क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जो निम्नलिखित है.....

1) नई दिल्ली 👉 उत्तर भारत

2) कोलकाता 👉 पूर्वी भारत

3) चेन्नई 👉 दक्षिण भारत एवं

4) मुंबई 👉 पश्चिम भारत


RBI की संरचना 

RBI 21 सदस्यो वाले "केंद्रीय निदेशक बोर्ड" द्वारा संचालित होता है।

इस केंद्रीय निर्देशक बोर्ड का चेरमेन RBI का गवर्नर होता है।

केंद्रीय निदेशक बोर्ड के सदस्य के बारेमे निम्नलिखित है......

👉 1 गवर्नर तथा 4 deputy governor। 

👉 4 क्षेत्रीय बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले चेरमेन।

👉 2 वित्तीय मंत्रालय की तरफ से व्यक्ति जो आम तौर पर “आर्थिक मामलों के सचिव” तथा “वित्तीय सेवाओं के सचिव” होते हैं।

👉 10 अन्य सरकार द्वारा नामित विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित निदेशक।


RBI के गवर्नर

👉भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर, भारतीय केंद्रीय बैंक (RBI) का मुख्य वर्ककर्मी होता है।

👉गवर्नर भारत के केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा उसके केंद्रीय निदेशक मंडल के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

👉RBI द्वारा जो भी नोट छापे जाते हैं उन पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।

👉RBI के वर्तमान गवर्नर – शक्तिकांत दास (25 में गवर्नर )


RBI के गवर्नर की नियुक्ति

✍️RBI ACT–1934 के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर को केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।

✍️गवर्नर की योग्यता के संबंध में अधिनियम में कोई शर्त नहीं दी गई है।

✍️प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्तीय मंत्रालय तथा रिटायर होने वाले गवर्नर से सलाह लेकर नए गवर्नर का चुनाव होता है।

✍️“कैबिनेट समिति” जो गवर्नर की नियुक्ति से संबंधित निर्णय को लेती है। उसके अनुसार गवर्नर की नियुक्ति FSRASC की सिफारिशों पर आधारित होती है । जिसका अध्यक्ष “कैबिनेट सचिव” होता है।

✍️गवर्नर को केंद्र सरकार के महाभियोग द्वारा हटाया जाता है।

✍️जब गवर्नर अनुपस्थित होते हैं तो वह स्वयं एक डिप्टी गवर्नर को नामित करता है जो केंद्रीय बोर्ड के चेयरमैन के रूप में कार्य करता है।

✍️गवर्नर और डिप्टी गवर्नर दोनों की पुनः नियुक्ति की जा सकती है एवं कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है। (सामान्य 3 वर्ष – महत्म – 5 वर्ष)


RBI के गवर्नर का कार्यकाल

👉“भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934”, खंड 8 (4) गवर्नर एवं डिप्टी गवर्नर के कार्यकाल के संबंध में बताया है जिसके अनुसार...... 

👉“गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर उस अवधि के लिए नियुक्त किए जाएंगे जो 5 वर्ष से ज्यादा नहीं होगा। इसका निर्धारण केंद्र सरकार नियुक्ति के समय कर सकेंगे तथा यह  पुनः नियुक्त के योग्य होगे।”

👉अर्थात गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर का कार्यकाल नियुक्ति  के समय केंद्र सरकार निर्धारित करेंगी जो कि 5 वर्षों से अधिक नहीं होता है।


RBI का कार्य 


1) मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वयन और निगरानी करना।

👉अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति तैयार की जाती है।

👉जिसमें RBI – SLR,CRR,Repo Rate, reverse repo rate,bank rate जैसे मौद्रिक नीति के साधनों के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था में महंगाई और मंदी को स्थिर करता है।

👉वर्ष में 6 बार मौद्रिक नीति का निर्धारित किया जाता है मतलब 2 महीनों में एक बार।

👉उद्देश्य – मूल्य स्थिरता बनाए रखना और उत्पादन क्षेत्र को पर्याप्त रूम उपलब्धता को सुनिश्चित कराना।


2) वित्तीय प्रणाली का विनिमय एवं पर्यवेक्षण करना।

✍️बैंकिंग परिचालन के लिए विस्तृत मापदंड निर्धारित करना जिसके अंतर्गत देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली काम करती है।

✍️उद्देश्य – बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना जमा कर्ताओं के हितों की सुरक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना।


3) विदेशी मुद्रा का प्रबंध

👉विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 का प्रबंध करता है।

👉भारत में विदेश से तीन प्रकार की मुद्रा प्राप्त होती है। जिसमें विदेशी मुद्रा,सोनू और SDR (पेपर सोनू) का समावेश होता है।

👉भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्राओ को खरीदता और बेचता है। और देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा भी करता है।

👉उद्देश्य– विदेश व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का विकास करना और उसे बनाए रखना।


4) मुद्रा जारी करना,उसका विनिमय करना और परिचालन योग्य न रहने पर उसका नष्ट करना।

✍️RBI ACT - 1934 - के अनुसार ₹2 से लेकर ₹10,000 तक के नोट छापने का अधिकार RBI को हैं।

✍️वर्तमान में ₹2 से ₹2000  तक का नोट छापा जाता है।

✍️“सरकार हर नोट को छापने के लिए उसके बराबर का सोना या संपत्ति RBI के पास जमा करती है। तब RBI उसके मूल्य के बराबर नोट छापता है। उस पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।”

✍️नोट छापने के लिए न्यूनतम आरक्षित प्रणाली का उपयोग किया जाता है।

✍️न्यूनतम आरक्षित प्रणाली में 200 करोड़ पूंजी आवश्यकता हो तो नोट छापे जाते हैं।

✍️जिसमे 85 नकद या विदेशी मुद्रा और 115 करोड़ का सोना होना चाहिए तो RBI नोट छाप सकती है।

✍️नोट छापने के लिए RBI स्वतंत्र नहीं है।

✍️RBI के छापखाने से केश में ₹ व्यापारी बैंकों के पास अथवा सरकार के पास पहुंचता है । व्यापारी बैंकों के पास से अन्य ग्राहकों के पास पहुंचता है। और जो सरकार के पास गया वह विविध योजनाओं के तहत लोगों को मिलता है।

✍️और जो नोट सड़ गई या टूट गई वह RBI के पास वापस आती है और वह RBI नष्ट कर देता है।


5) सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करना

👉RBI अधिनियम की शर्तों में रिजर्व बैंक को केंद्रीय सरकार की प्राप्ति और भुगतान एवं विनिमय प्रेषण और अन्य बैंकिंग गतिविधियां का उत्तरदायित्व संभालता है।

👉रिजर्व बैंक को भारत में सरकारी कारोबार करने का अधिकार है। वह सरकार के बॉन्ड या अन्य सरकारी जमिनगिरि बेचने और खरीदने का कार्य करता है।

👉अधिनियम के अनुसार राज्य सरकारों के साथ करार कर,भारतीय रिजर्व बैंक राज्य सरकार के साथ लेनदेन कर सकता है।

👉भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र और राज्य सरकारों के प्रमुख खाते रखता है।

👉भारतीय रिजर्व बैंक ने पूरे भारत में सरकार की ओर से राजस्व संग्रह करने के साथ-साथ भुगतान करने के लिए संचालित व्यवस्था करता है।


6) बैंको  के बैंक एवं बैंक के रूप में कार्य करना।

✍️RBI सभी “अनुसूचित बैंको एवं व्यापारी बैंकों” के बैंक रखता है। जैसे हमारा खाता बैंक में होता है वैसे ही बैंक का खाता RBI में होता है।

✍️RBI बैंकों की ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है।

बैंक की ₹5 लाख तक जमा राशि  पर बीमा सुविधा।

✍️2020–21 के बजट में बीमा सुविधाएं 1 लाख से बढ़ा कर 5 लाख ₹ करदी


7) साख नियंत्रण करना

👉प्रारंभिक जमा के आधार पर कई गुना जमा का सर्जन कर देना ही साख निर्माण कहलाता है। यह और अर्थतंत्र में फुगावे की स्थिति रूपांतरित कर सकता है।

👉जिसके लिए RBI साख नियंत्रण करती है। जो “मुद्रा की मात्रा को नियंत्रण करना ही साख नियंत्रण कहलाता है।” इसे मौद्रिक नीति भी कहते हैं।

इसका नियंत्रण दो प्रकार से होता है........

1) मात्रात्मक नियंत्रण एवं

2) गुणात्मक नियंत्रण।


8) मुद्रा की लेनदेन को नियंत्रण करना

👉RBI भारत की अर्थव्यवस्था में मुद्रा के लेन-देन को नियंत्रित करने का काम करता है।

👉जैसे के अर्थव्यवस्था में मुद्रा बढ़ गई हो तो उसे घटाए गा अगर जो मुद्रा घट गई हो तो उसे बढाएंगा।

👉उस तरह से RBI भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी या फुगावे से बचाता है।


9) विकासात्मक भूमिका

✍️सरकार को समय-समय पर RBI विकास से संबंधित सलाह देता है और आर्थिक नीतियों के निर्माण में RBI द्वारा सहायता की जाती है।

✍️वित्तीय संस्थाओं की मजबूती के लिए विविध उपयोको RBI द्वार आजमाया जाता है।



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