Wednesday, May 26, 2021

सार्क सम्मेलन (SAARC)

 इस पोस्ट में हम सार्क सम्मेलन के बारे में जानेंगे। सार्क सम्मेलन की स्थापना,सदस्य देश,इसकी विशिष्ट निकाई, सार्क के मुख्य केंद्र, भारत का उसमें क्या रोल है,सार्क सम्मेलन के शिखर सम्मेलन के बारे में और भारत को क्यों सार्क सम्मेलन फिर से शुरू करना चाहिए उसके बारे में हम जाने गै,सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।


सार्क सम्मेलन क्या है।

द्वितीय विश्वयुद्ध ई.स 1945 के बाद विश्व की राजनीति में बहुत बदलाव आए। इसके परिणाम स्वरूप क्षेत्रीय संगठनों का गठन हुआ जो समान हीतो और अधिक भौगोलिक स्थिति से जुड़े हैं और उसने कई क्षेत्रीय संगठनों को जन्म दिया जिसमें से हम सार्क सम्मेलन/संगठन की बात करेंगे।

सार्क एक क्षेत्रीय संगठन हैं और सार्क का मुख्य विचार दक्षिण एशिया राज्यों के सहयोग के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों को इस्तेमाल करके लोगों के कल्याण में बढ़ावा करना,उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना,आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए और सदस्य देशों में शांति सद्भाव स्थापित करना ईस उद्देश्य से ए सम्मेलन प्रारम्भ किया गया है। SAARC full from (the South Asian association of regional cooperation)दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन.

सार्क सम्मेलन की स्थापना और उसके सदस्य देश

सार्क सम्मेलन की स्थापना 8 दिसंबर,1985 को ढाका,बांग्लादेश में हुई थी और उसके बाद 16 जनवरी 1987 के सचिवालय की स्थापना नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई थी।

सार्क सम्मेलन में पूरे विश्व की 21% आबादी और 3% भौगोलिक क्षेत्र का समावेश होता है और उसके साथ यह सम्मेलन विश्व की अर्थव्यवस्था का 4.21% हिस्सा रखता है।

इस सम्मेलन में सदस्य देशों से व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए। 1.6 अरब अरब लोगों का मुक्त व्यापार केंद्र बनाया गया ता की सभी वस्तुओं के सदस्य देशों में कर कम किया जा सके और उस को सफल करने के लिए जनवरी 2006 को साफ्टा समझौता हुआ वह 8 सदस्य देशों के अनुसमर्थन के बाद प्रारंभ किया गया।


सदस्य देश

सार्क सम्मेलन की स्थापना के वक्त निम्नलिखित देश शामिल थे। 

जिसमें...

👉बांग्लादेश 

👉भूटान 

👉भारत 

👉मालदीव 

👉नेपाल 

👉पाकिस्तान

 👉श्रीलंका 

इस देशों का समावेश होता था।

और उसके बाद अप्रैल,2007 को अफगानिस्तान नए सदस्य के रूप में शामिल हुआ। वर्तमान में सार्क सम्मेलन में 8 सदस्य देश शामिल हैं।

और सार्क सम्मेलन में 9 पर्यवेक्षक सदस्य देश है जिसमें.....

👉ऑस्ट्रेलिया

 👉चीन 

👉यूरोपियन यूनियन 

👉ईरान 

👉जापान

👉रिपब्लिक ऑफ कोरिया 

👉मॉरिशस

👉म्यानमार

👉संयुक्त राज्य अमेरिका


सार्क सम्मेलन की मुख्य निकाय

(1) सार्क विकास कोष (SDF)

   👉इस संस्था का सचिवालय थिंफू भूटान में स्थित है।

👉इस संस्था का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में सहयोग आधारित परियोजनाओं का वित्तपोषण करना है। जेसे की..... विकास,गरीबी अनमूलन  यादी।


(2) दक्षिण एशियाई मानक संगठन (SARSO)

👉इस संस्था का सचिवालय बांग्लादेश के ढाका में स्थित है।

👉इस संस्था की स्थापना सार्क के सदस्य देशों के बीच मध्यस्थ समन्वय और सहयोग बढ़ाने के लिए की गई है।


(3) सार्क मध्यस्थ परिषद

👉यह संस्था का सचिवालय इस्लामाबाद,पाकिस्तान में स्थित है।

👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के वाणिज्य, औद्योगिक, व्यापारिक, बैंकिंग जैसे कार्य के विवाद को निपटाने के लिए एक  कानून बनाती है।


(4) दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय 

👉यह संस्था का सचिवालय नई दिल्ली भारत में स्थित है।

👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के बीच अभ्यास को बढ़ावा देती हैं।

संगठन का कार्य क्षेत्र

👉 मानव संसाधन विकास एवं पर्यटन इस्लामाबाद,पाकिस्तान

👉 कृषि एवं ग्रामीण विकास–ढाका,बांग्लादेश

👉 पर्यावरण, प्राकृतिक आपदा एवं बायोटेक्नोलॉजी–गांधीनगर,भारत

👉 आर्थिक,व्यापार एवं वित्त–थिंफू–भूटान

👉 सामाजिक मुद्दे–कोलंबो,श्रीलंका

👉 सूचना एवं गरीबी उन्मूलन–काठमांडू,नेपाल

👉 ऊर्जा,परिवहन विज्ञान एवं प्रौद्योगिक–इस्लामाबाद, पाकिस्तान

👉 सार्क से रोग एवं (HIV)–काठमांडू,नेपाल

👉 सार्क दस्तावेजकरण – नई दिल्ली,भारत


भारत का सार्क सम्मेलन में क्या रोल है।

India policy neighborhood first, global leadership & role act East policy पे भारत काम करता है और वह सार्क सदस्य देशों में सबसे ज्यादा वस्ती का देश है इसलिए वह बिग ब्रोधर का  कार्यकर्ता है।



सार्क के शिखर सम्मेलन

1) 7–8 दिसंबर, 1985  बांग्लादेश , ढाका      अफौर रहमान खान.

2) 16–17 नवंबर 1986 भारत , बेंगलुरु         राजीव गांधी

3)2–4 नवंबर 1987 नेपाल,काठमांडू    king Birendra bir Bikram Shah


4) 29–31 दिसंबर 1986 पाकिस्तान,इस्लामाबाद बेनज़ीर भुट्टो


18) 26-27 नवंबर 2014–नेपाल,काठमांडू –सुशील कोलराला ।

19) 15–16 नवंबर 2016–पाकिस्तान, इस्लामाबाद–भारत के विरोध से बंध।(भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती)

भारत के लिए क्यों सार्क सम्मेलन जरूरी है।

👉पड़ोसी देश: –सार्क सम्मेलन के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास को शांति स्थापना में सहयोग कर सकता है ।

👉भू–रणनीतिक महत्व :–भारत विकास प्रक्रिया और सहयोग से नेपाल,भूटान,मालदीव और श्रीलंका को अपनी ओर आकर्षित करके चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला और चीन के वन बेल्ट एंड वन रोड कार्यक्रम का विरोध कर सकता है।

👉 वैश्विक नेतृत्व की भूमिका :–सार्क सम्मेलन भारत को अंतरिक्ष जिम्मेदारियां लेकर क्षेत्र में अपने प्रभाव से विश्व में एक अच्छी सांप स्थापित कर सकता है।

👉भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए महत्वपूर्ण :– दक्षिणी एशियाई अर्थव्यवस्था को दक्षिण पूर्व एशिया के साथ लिंक कर के मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में भारत के लिए आर्थिक एकीकरण और समुध्धि में आगे लाया जा सकता है। 

👉Covid–19 महामारी :–covid–19 महामारी पूरी दुनिया मेंं   फैली हुई है और जिसमें भारत दक्षिण एशियाई देशों के साथ खड़ा है और भारत को दक्षिण एशिया देशों  से काफी मदद भी मिल रही है।जिससे भारत का विश्व लेवल पर प्रभाव बढ़ेगा।


सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।

(1) भारत और पाकिस्तान के संबंध

👉भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर केंद्रित विवाद है।

👉भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव और संघर्ष ने सार्क के समझौते को कम किया है।

(2) अंशुल जैसी मां और समुद्री मुद्दे

👉इसमें भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के वितरण का विवाद 

👉भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी के जल वितरण पर केंद्रित और कुछ हाल ही में विवाद सीमाक्षेत्र पर दिखाया जा सकता है। जैसे काला पानी और लिपुलेख विवाद।

(3) विश्वास की खोट बिग ब्रदर सिंड्रोम

👉सामूहिक निर्भरता और सदस्यों के पारस्परिकता के बीच अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

(4) कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता

👉दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं के बीच आम सहमति तक पहुंचना बहुत मुश्किल है क्योंकि उनकी राजनीतिक प्रणाली बहुत अलग है। उदाहरण के रूप में भारत में संघ संसदीय लोक प्रणाली हैं।भूटान में एक संवैधानिक राजतंत्र है और नेपाल में एक राजाशाही शासन प्रणाली है।

(5) आतंकवाद और चीन कारक

👉पाकिस्तान विभिन्न आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। और उसके लिए भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती। शक्तिकांत देशों ने भारत की इस बात का समर्थन किया। सार्क सम्मेलन के देश आज चीन की तरफ खिसने लगे हैं।




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Saturday, May 15, 2021

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

 ISA भारत द्वारा शुरू किया गया एक गठबंधन है जिसमें 120 से अधिक देश शामिल है और 18 जेसे देश फ्रेमवर्क समझौता में जुड़े हुए है। इस संगठन में अधिकांश सदस्य देश धूप वाले गर्म देश है। जो पूरी तरह या आंशिक रूप से मकर रेखा और कर्क रेखा के बीच स्थिर है।

भारत ने भविष्य में ऊर्जा जरूरतों को पूर्ण करने के लिए इसका शुभारंभ फ्रांस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी ने सयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन,30 नवंबर 2015 को COP21 के दौरान पेरिस, फ्रांस में संयुक्त रूप से किया था।

फ्रांस, इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को बढ़ाने के लिऐ 2022 तक 5600 करोड रुपए का फंड देगा जिससे सदस्य देशों में अन्य सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।

क्या है सौर ऊर्जा

सूर्य से प्राप्त सूर्य किरणों को सौर ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा को  विद्युत में बदलकर DC/AC पॉवर  में लाया जाता है। सूर्य किरणों से प्राप्त उर्जा को DC/AC पॉवर में बदल ने के लिए सोलर पैनल की आवश्यकता होती है। सोलर पैनल में  छोटे-छोटे सिलिकॉन के सेल लगे होते हैं। एस सेल के माध्यम से सूर्य ऊर्जा को ऊष्मा या विद्युत में बदला  जाता है।

इस गठबंधन के उद्देश्य

इस वैश्विक गठबंधन का उद्देश्य स्थायी और ऊर्जा के व्यापक और तीव्र इस्तेमाल के माध्यम से पेरिस जलवायु समझौते के कार्यन्वयन में योगदान करना है।

दूसरा उद्देश्य 1000 गीगावोट से अधीक सौर ऊर्जा उत्पादन की वैश्विक क्षमत प्राप्त करना है। और 2030 तक सौर ऊर्जा निवेशन के लिए लगभग 1000 बिलियन डॉलर की रासी जुटना हैं।


इस अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत की क्या भूमिका है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका सचिवालय भारत में गुरुग्राम (हरियाणा) में होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कद में बढ़ावा होगा।

भारत २०२२ तक भारत अपने ऊर्जा स्त्रोतों से 175 गीगावॉट बिजली का उत्पादन करेगा जिसमें 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा होगी(जो ISA के उद्देश्य का 10% होगा),60 गीगावॉट पवन ऊर्जा होगी, 10 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा होगी और 5 गीगावॉट जलविद्युत परियोजना से प्राप्त होगी।

फ्रेमवर्क समझौता में संशोधन

संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों राज्यों के लिए गठबंधन की सदस्य प्रदान करने के लिए 8 जनवरी, 2021 को ISA ने फ्रेमवर्क समझौता में संशोधन के बाद इतालवी गणराज्य ने ISA के फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। जो 17 मार्च,2021 को इटली ने भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिऐ हस्ताक्षर किए हैं।






Thursday, May 13, 2021

सिंधु–घाटी सभ्यता का उद्भव और विकास

 👉👉  इस लेख में हम सिंधु–घाटी  सभ्यता का विस्तार,शहरी योजना और सरचनाई,  कृषि,पशुपालन, कारीगरी और शिल्प, व्यापार एवं वाणिज्य, राजनीतिक संगठन, धार्मिक परंपराएं, पुरुष देवता, वुक्ष और पशु की पूजा,हड़प्पा लिपि, माप–तौल, बर्तन, मोहर और मुद्रण, मूर्तियां और सिंधु सभ्यता के अंत के बारे में जाने गै।



👉सिंधु–घाटी सभ्यता का विस्तार

हड़प्पा संस्कृति की खोज सन् 1853 में एक महान उत्खनन कर्ता और खोजी ब्रिटिश इंजीनियर ए. कनिंघम का ध्यान एक हड़प्पा मुहर पर गए। लेकिन वह उसकी महत्व से वसित रहे। उसके बाद हड़प्पा स्थलों की पहचान  सन् 1921 में की गई। भारतीय पुरातत्वविद दयाराम साहनी ने इस खुदाई शुरूकी।

हड़प्पा संस्कृति का मुख्य क्षेत्र सिंध और पंजाब में मुख्यतः सिंधु–घाटी में था। वहां से वह दक्षिण–पूर्व की और पंजाब,हरियाणा,सिंधु,बलूचिस्तान,गुजरात,राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश के किनारे फैली थी। और यह उत्तर में शिवालिक से दक्षिण में अरब समुद्र तक और पश्चिम में बलूचिस्तान में मकरन तट से उत्तर पूर्व में मेरठ तक फैला था।

समुद्र के किनारे पर एक त्रिभुज जेसा स्थान का गठन किया जो लगभग 12.966 लााख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था।
जो कि यह प्राचीन मिस्त्री और मेसोपोटामिया की तुलना में बहुत बड़ा है।
पूरे उपमहाद्वीप में अभी तक लगभग 2800 हड़प्पा स्थलों की पहचान हो गई है।
विकसित स्थलों के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में चे पंजाब में हड़प्पा और सिंधु में मोहन–जो–दड़ो (दोनों पाकिस्तान में है) और उसके बाद तीसरे स्थान पर चान्न्हू–दरों, चौथे स्थान पर गुजरात का लोथल,पांचवे स्थान पे उत्तरी राजस्थान का कालीबंगा(काली चुड़िया) छठा शहर बनावली हरियाणा में।
और बाद में हड़प्पा काल के संकेत गुजरात के काठियावाड़ में रंगपुर और रोजड़ी में से मिले।

👉 शहर योजना और संरचनाऍ

हड़प्पा और मोहन–जो–दड़ो दोनों के शहर दो भागों में विभाजित थे गढ़ और टिले में।
शहर के इन आवासीय व्यवस्थाओं का महत्व यह है कि वहां के शहर एक खास संरचनात्मक प्रणाली में बने थे।
जिसमें सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थी।
मोहन–जो–दड़ो का महत्वपूर्ण स्थान महान स्नानागार है।
इसकी लंबाई 11.88×7.01 मीटर और गहराई 2.43 मीटर है। और तालाब के किनारे पर कपड़े बदलने के लिए छोटे कमरे थे।
मोहन–जो–दड़ो में सबसे बड़ा भवन 45.71 मीटर लम्बा और 15.23 मीटर चौड़ा एक अन्न–भंडार है। हड़प्पा के गढ़ में ऐसे छह भंडार पाए गए है।
हड़प्पा में दो कमरों की सावनी थी।

👉 कृषि:–

बहुत कम वर्षा वाला सिन्धु प्रदेश आज बहुत उपजाऊ नहीं है परंतु प्राचीन समय में उपजाऊ था।
नील नदी ने जैसे मिस्त्री का निर्माण किया वैसे सिंधु नदी ने सिंध का निर्माण किया और सिंधु वासियों को समुद्ध बनाया।
नवंबर में सिंध के लोग बाढ़ के मैदानों में बीज बातें और अप्रैल में अपनी फसल  काटते थे।
 वहां कोई कुदाल के हल नहीं पाया गया। लेकिन कालीबंगा मैं हल के अवशेष मिले हैं। और फसल काटने के लिए हसिया का इस्तेमाल किया गया होगा।
जल संग्रह के लिए बांधों से गिरे गबरबंन्द या नाला था।
सिंधु सभ्यता के लोगों ने गेहूं, जौ, राई,मटर जैसे खाद पदार्थ और तेली पदार्थ में तिल, सरसों जैसे उपजाए जाते थे।
ई.पू.1800 के पहले लोथल के लोग चावल और गेहूं ऊगाते थे जिसके अवशेष मिले हैं।
सिंधु के लोग कपास का उत्पादन करने वाले पहले लोग थे ।इसलिए यूनानीयाे ने यह क्षेत्र को सिन्धन (Indus) नाम दिया है।









Friday, May 7, 2021

भारत की राज्यव्यवस्था –१

 👉इस लेख में हम भारत की राज्य प्रणाली की ऐतिहासिक पुष्ठभूमि के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

   

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।


भारत में ब्रिटिश 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने के लिए आई। उसको ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के चार्टर द्वारा व्यापार करने  का अधिकार लेे लिया और वह सन् 1608 मैं Hector नाम के जहाज से भारत की ओर व्यापार करने के लिए आए और वह जहाज का कप्तान विलियम हॉकिंस था। और वह जहाज सूरत बंदरगाह पर जाकर रुका और तब वहां केेेे शासक जहांगीर थे। वहां जाकर विलियम हॉकिंग ने जहांगीर से ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार करने की अनुमती ले ली।
और ईस्ट इंडिया कंपनी ने आगे ही आगे सिद्धि प्राप्त की और 1757 में प्लासी का युद्ध किया जिससे उसको बहुत फायदा हुआ।
बाद में आगे जाते 1764 में बक्सर का युद्ध कराया और कंपनी को उससे बहुत फायदा हुवा और उसके बाद 12 अगस्त,1965 इलाहाबाद की संधि से जो कंपनी व्यापार करने तक सीमित थी उसको बंगाल,बिहार और ओडिशा के दिवानी अधिकार प्राप्त कर लिऐ।
फिर 1773 में कंपनी को नियंत्रण करने के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट ने एक्ट बनवाया उससे 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट कहा गया। उसके बाद क्रमश कंपनी के एक्टर में सुधारा होता रहा। और फिर 1857 में हुए सिपाही विद्रोह के कारण कंपनी का शासन टका ना बहुत मुश्किल हो गया था। तब भारत का शासन ब्रिटिश ताज के हाथों में चला गया। और उसने भारत शासन अधिनियम 1858 बनाया। हमें इस एक्ट को दो भागों में विभाजित करेंगे।



  • कंपनी का शासन.(1773 – 1858)
        1773 का रेगुलेटिंग एक्ट.
     इस अधिनियम को न्यूमैन अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
इस अधिनियम के तहत किए गए संशोधन

  • इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को  "बंगाल का गवर्नर जनरल"  बनादीया गया।
  • और बंगाल के अतीम गवर्नर और पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स को बनाए गया।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत कोलकाता में 1774 में कार्ट विलीयम ने उच्चतम न्यायालय की स्थापना की,जिसमें मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश थेे । और उसकेेेेे प्रथम मुख्य न्यायाधीश एलिजा एम्पे थे।
  • EIC के कार्यों पर नियंत्रण ब्रिटिश सरकार करेंगे।
  • केंद्रीयकरण की प्रक्रिया की शुरुआत।
  • भारत में ब्रिटिश राज के लिए लेखिक बंधारण की रचना की गई।
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की शुरुआत जिसमें 4 सदस्य नियुक्त होगी।
  • पहली बार भारत में कंपनी के कर्मचारियों पर आचार संहिता लादी।
    pit's india act 1781 

इस अधिनियम का नाम ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पिट्स के नाम पर से रखा गया है।
पिट्स एक्टर का महत्व........ 
  • इस एक्ट को 1773 के एक्ट में जो खामियां थी उसको दूर करने के लिए बनाया गया है।
  • इस अधिनियम के तहत पहली बार कंपनी के नियंत्रण प्रदेश ब्रिटिश अधिकृत भारतीय प्रदेश का नाम दिया गया।
  • भारत और  ईस्ट इंडिया कंपनी पर ब्रिटिश क्रोऊ का नियंत्रण रहेगा।
  • पहली बार कंपनी के राजकीय कार्यों और व्यापारिक प्रवृत्तियों को अलग कर दिया गया।
  • इसी कानून द्वारा कोलकाता के सभी निवासियों को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत कर दिया गया।

     1833 का चार्टर अधिनियम

  • इस अधिनियम ने बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया।
  • बंगाल के अंतिम गर्वनर जनरल और भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक को बनाया गया।
  • इस कानून के तहत कंपनी के व्यापारिक अधिकार को समाप्त कर दिए।
  • प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया और उसके अध्यक्ष लॉर्ड मेंक्लॉ को बनाया गया। ईसको मेक्लो समिति से भी जाना जाता है।
  • दास प्रथा विधि विरुद्ध पोषित 1843 में लॉर्ड एलनबरो द्वार पूर्ण जन्मूलन।

       1853 का चार्टर अधिनियम

इस अधिनियम की विशेषताएं.......
  • भारत में सिविल सेवा सभी के लिए खोल दी गई,खुली प्रतियोगिता के आधार पर चयन का प्रावधान– मेक्लो समिति की सिफारिश पर।
  • ब्रिटिश संसद द्वारा घोषणा की गई कि EIC का शासन कभी भी समाप्त हो जाएगा।
  • संसदीय शासन प्रणाली (केंद्र में छोटे स्तर पर विधानसभा का निर्माण) की शुरुआत।

ताज का शासन [1858 से 1947 तक]

1858 का भारत सरकार अधिनियम
       
1857 में हुए सिपाही विद्रोह के कारण इस अधिनियम को पारित किया गया।
इस अधिनियम से कंपनी का शासन को समाप्त कर दिया गया।
इस कानून को गुड गवर्नस एक्ट भी कहा जाता है।
इस अधिनियम के तहत भारत का शासन ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया  को स्थानांतरित हो गया।
अधिनियम के तहत गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर "भारत का वायसराय" कर दिया गया।
 और भारत के अंतिम गवर्नर जनरल और भारत के प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग को बनाया गया।
  • इस अधिनियम में एक नए पदको उमेरा गया जो ,"भारत के राज्य सचिव" का था। 
  • और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्य भारत परिषद  की स्थापना की गई और उसका अध्यक्ष भारत सचिव को बनाया गया।
  • इस अधिनियम से भारत की राज्य व्यवस्था निम्नलिखित थी।


1861 का भारत परिषद अधिनियम
     इस अधिनियम के तहत लॉर्ड कैनिंग द्वारा 1859 मैं  पोर्टफोलियो प्रणाली की शुरूआत की।
विभागीय प्रणाली की शुरुआत
1773 के एक्ट की विकेंद्रीकरण प्रणाली की शुरुआत की।
कार्यकारी परिषद का विस्तार और गैर–सरकारी सदस्यों की नियुक्ति की गई।
1862 मैं लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीय बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को विधान परिषद में मनोनीत किया।
और विधान परिषद की स्थापना की गई।


1909 का भारत परिषद अधिनियम
इस अधिनियम को मोर्ले–मिंटो ऐक्ट भी कहा जाता हैं।

इस अधिनियम की विशेषताएं......
  • इस अधिनियम से  ज्ञातीवाद की शुरुआत हुई थी इससे मुस्लिम लोगों को सांप्रदायिक निर्वाचन का अधिकार दिया।
  • मोर्ले–मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता हैं।
  • डॉ.राजेंद्र प्रसाद  पाकिस्तान का जनक अथवा जन्मदाता लॉर्ड मिंटो को कहते हैं
  • और सत्येंद्र प्रसाद सिंहा पहले भारतीय थे जिसकी नियुक्ति गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में विधि सदस्य के रूप में हुई थी।
 भारत शासन अधिनियम 1919
इस अधिनियम को मोंटेग्यू–चेम्सफोर्ड सुधारा भी कहा जाता है।
इस अधिनियम से प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत की गई।
विषयों का बंटवारा आरक्षित और हस्तांतरित कर दिया।
केंद्र में द्विसदनीय विधायिका की शुरुआत राज्यसभा और लोकसभा का गठन किया गया।
भारत के उच्चायुक्त के पदों का सूजन।
महिला को पहली बार मत देने का अधिकार।
ली आयोग की अनुशंसा के आधार पर लोक सेवा आयोग (psc) का गठन 1926 में।
वैधानिक आयोग का गठन।
पहली बार राज्य बजट को केंद्रीय बजट से अलग किया गया और राज्य विधानसभा अपने बजट खुद बना सकती थी और 1926 में रेलवे बजट को आम बजट से अलग किया गया।

Rowlatt act
रौलट एक्ट का सत्य नाम Anarchical and revolutionary crimes act था।
यहां अधिनियम 6 माह तक सीमित रहा।


भारत शासन अधिनियम,1935
  • इस अधिनियम से प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दिया और प्रांतों को स्वशासन का अधिकार मिल गया।
  • केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत।
  • अखिल भारतीय संघ की स्थापना की सिफारिश।
  • बर्मा को भारत से अलग किया गया।
  • उड़ीसा को बिहार से अलग किया गया।
  • संघीय न्यायालय की स्थापना दिल्ली में की गई।
  • प्रांतीय जाहेर सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)की शुरुआत ।
  • केंद्रीय बैंक की स्थापना–रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 1अप्रैल,1935 को RBI ACT 1934 के तहत की गई। (और उसका राष्ट्रीयकरण 1 अप्रैल, 1949)
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम,1947
  • ब्रिटिश संसद की प्रभुसत्ता की समाप्ति।
  • भारत सचिव पद की समाप्ति।
  • भारत का विभाजन कर भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राज्यों के निर्माण का प्रावधान।
  • देसी रियासतों को किसी भी राज्य में शामिल होने का अधिकार या खुद के बारे में निर्णय लेने का अधिकार।
  • 15 अगस्त,1947 को भारत को स्वतंत्र दायर कर दिया गया।
  • इस अधिनियम में शाही उपाधि से "भारत का सम्राट" शब्द समाप्त कर दिया।
  • 14–15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत में ब्रिटिश शासन का अंत हो गया और समस्त शक्तियां दो नए स्वतंत्र डोमिनेशन को प्राप्त हुई।
  • लॉर्ड माउंटबेटन नए डोमिनियन भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
  • उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई।


Thursday, May 6, 2021

ब्रह्मांड की सामान्य माहिती

  (इस लेख में हम ब्रह्मांड की उत्पत्ति, ब्रह्मांड, आकाशगंगा , हमारी आकाशगंगा ,निहारिका,श्वेत वामन,कृष्ण छिद्र अथवा न्यूट्रॉन सितारे, और सौर मंडल की उत्पत्ति को देखेंगे।)

 ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में आधुनिक जानकारी के अनुसार, जॉर्जेस लेमिट्र ने 19 वीं शताब्दी में बिग बैग थ्योरी पेश की, और उनका विचार था कि “एक छोटे कण में बहुत सारी ऊर्जा इकट्ठा हुई और विस्फोट हुवा जिससे सितारों, उल्कापिंड, ग्रहों और उपग्रहो का निर्माण हूवा।

 फिर 1940 में, जॉर्ज गैमोव और मारियो शोनबर्ग, वैज्ञानिकों ने कहा कि “न्यूट्रिनो हमारे पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति और सुपरनोवा सितारों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है।“ सुपरनोवा एक विशालकाय तारा है। जो आकाश में फटता है और उसमें मौजूद रसायन पूरे ब्रह्मांड में फैल जाते हैं और उससे ग्रह, उपग्रह, तारे, उल्कापिंड आदि उत्पन्न होते हैं और इस तरह समय के साथ ब्रह्मांड की उत्पति हुई।

 फिर, बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, स्टीफन हॉकिंग नाम के एक वैज्ञानिक ने बिग बैंग थ्योरी को एक बार फिर से समझाते हुए कहा, “एक बिंदु पर मौजूद ब्रह्मांड में एक से बड़ी एक घटना हुई और बिंदु के कण एक दूसरे से दूर भागने लगे । इसे बिग बैंग अथवा महाविष्फोट कहा जाता है। और इसमें से तारे, आकाशगंगाओं आदि का निर्माण हुआ और समय बीतने के साथ एक ब्रह्मांड का निर्माण हुआ।

 लेकिन ब्रह्मांड की उत्पत्ति आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य है। और यह समझने के लिए आज भी लंडनकि “CERN Physics lab” में “God partical” पर प्रयोग किए जा रहे हैं। जो बिग बैंग थ्योरी से जुड़ा हुआ है।

  • ब्रह्माण्ड (The Universe)

 "सूक्ष्मतम अणुओ से लेकर महाकाय आकाशगंगाओ के समूह को हम ब्रह्मांड कहते हैं।"और ब्रह्मांड अत काल तक विस्तारित है। ब्रह्मांड में उपग्रह,ग्रह,तारे,आकाशगंगा इत्यादि समस्त खगोलीय पिंड समाविष्ट है। किसी को मालूम नहीं कि ब्रह्मांड कितना बड़ा है लेकिन खगोलीय विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड में 100 अरब मंदाकिनीय है और हर एक मंदाकिनी में 100 अरब सितारे हैं।

  • आकाशगंगाऍ (Galaxies)

"आकाशगंगा असंख्य तारो का एक विशाल समूह होता हैं।" 

    ब्रह्मांड की रचना में आकाशगंगाए बिल्डिंग –ब्लॉक का स्थान रखती है ,अर्थात ब्रह्मांड की रचना आकाशगंगा  से होती है।

  ब्रह्मांड की आकाशगंगा ओ को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

 1) नियमित आकाशगंगाऍ ।

          a) सर्पिलाकार आकाशगंगाऍ 

              सर्पीलाकर आकाशगंगाओ में पुराने सितारे मध्य भाग में तथा नए एव अधिक चमकने वाले सितारे उनकी भूजाओ में पाए जाते हैं।

          b) दिर्धवुत्ताकार आकाशगंगाए

 2) अनियमित आकाशगंगाऍ ।


  • हमारी आकाशगंगा(मंदाकिनी आकाशगंगा)

हमारी आकाशगंगा का नाम मंदाकिनी हैं। इसका ब्याज लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष के बराबर है तथा केंद्र में इसका व्यास 10000 के बराबर है । मंदाकिनी सितारों तथा धूल से भरी हुई है तथा इसकी भुजाओं में जुड़वा सितारे पाए जाते हैं। अभी तक शुद्ध रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि सूर्य आकाशगंगा के केंद्र से कितना दूर है परंतु  परंपरागत रूप 30,000 प्रकशवर्ष के बराबर माना जाता है।  पूरी आकाशगंगा अंतरिक्ष में परिक्रमा कर रही है। इसके केंद्रीय भाग के सितारे, बाह्य भाग के सितारों के तुलना में तीव्र गति से परिक्रमन करते हैं। हमारा सूर्य आकाशगंगा का एक चक्कर लगभग 22 करोड़ (220 Million) वर्ष में लगाता है। हमारी अकाशगंगा की सबसे नजीक कि अकाशगंगा एंड्रोमेडा हैं। जो हमारी आकाशगंगा से 2.2 मिलियन प्ररकाश–वर्ष की दूरी पर थीर हैं। प्रक्सिमा सेंचूरी  सूर्य का निकट का तारा है। जो सूर्य सेे 4.3 प्रकाशवर्ष दूर हैं।  


निहारिका (Nebula)

सूर्य के द्रव्यमान से 1.4 गुना भारी तारे अपने द्रव्यमान को नियंत्रित न कर पाने से उसका केंद्र अचानक संकुचित हो जाता है। जिससे एक महाकाय विस्फोट होता है। जिसे सुपरनोवा भी कहते हैं जिसमें से फेंके गए पदार्थ मंदाकिनीओ में गिरते हैं और वह समय के अनुसार धूल के बादल मैं रूपांतरित हो जाते हैं। जिसे निहारिका कहते हैं । यदि  निहारिका केेेेेेे बादल की गैस उज्जवलेेत हो जाए तो निहारिका चमकने लगती है।


  • श्वेत वामन: –

 श्वेत वामन सितारे किसी समय सामान्य सितारों के भ्राति थे धीरे-धीरे उनका प्रज्वलन के लिए इनके नाभिक ईंधन समाप्त हो जाता है। तब वह अपनी मुत्यु की ओर बढ़ते हैं। और जो बसे हुए तारे का द्रव्यमान सूर्य से 1.4 गुना हो जाए तो वे श्वेत वामन तारा बन जाता है।जिसका आकार पृथ्वी जैसा बन जाता है परंतु उनका धनत्व सूर्य के समान होता है और जल की तुलना में उनका घनत्व दस लाख गुना हो जाता है।

ऐसा तभी संभव होता है जब इलेक्ट्रॉन अपना स्थान बदलकर नाभि के नजदीक आ जाए और श्वेत वामन तारे धीरे धीरे मंद होते होते काले वामन के रूप में मंद हो जाते हैं। जिसके कारण वे ठंडा और धुंधला पड़ जाता है और उसकी अंतिम अवस्था कृष्ण वामन की हो जाती है।

  • कृष्ण छिद्र अथवा न्यूट्रॉन सितारे:–

  1.4 सौर द्रव्यमान से भारी "शेष तारा केंद्र" का गुरुत्व कुछ सीमा तक प्रमाणिवक तथा नाभीकिय बलों पर प्रभावी हो जाता है। जिससे तारा का केंद्र न्यूट्रॉनिक एक भारी गेंद  बन जाता है ।जिसे न्यूट्रॉन तारा कहते हैं।

  • सौर मंडल:–

सूर्य के परिवार को सौरमंडल कहतेे हैं। सौरमंडल में आठ ग्रह, एक छोटा ग्रह प्लूटो, बहुत से चंद्रमा तथा अनगिनत ग्रहिकाएं , उल्काए, धूमकेतु आदी सम्मिलित हैै जो सूर्यय के चारों ओर परिक्रमा करते है। ऊष्मा तथा प्रकाश सूर्यसे आता है।

  • सौर मंडलकी उत्पत्ति :–

कहा जाता है कि ,अंतरिक्ष में अवस्थित विशाल बादलों में गुरुत्वाकर्षण के नष्ट होने के कारण सौरमंडल की उत्पत्ति हुई सूर्य से दूर जाते हुए ग्रहों की संरचना एवं घनत्व में विभिन्न इस तथ्यको सिद्ध करते हैं। उदाहरण के लिए जो ग्रह सूर्य के निकट है ,वह चट्टानो तथा धातु के बने हुए हैं जो उसे तापमान पर बने थे । इसके विपरीत सूर्य से अधिक दूरी पर पाए जाने वाले ग्रहों की उत्पत्ति ऐसी धातूओ से हुई जो कम अथवा निम्न तापमान पर ढोस होती है।

अधिकतर वैज्ञानिकों का विश्वास है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति लगभग 15 अरब वर्ष पूर्व हुई थी। इसके संबंध में कहा जाता है कि भारी बिग बैक धमाका हुआ था। इस धमाके के फलस्वरुप भौतिक पदार्थों ने बिखर कर मंदाकिनीयो, सितारों तथा ग्रहों का रूप धारण कर लिया। वैज्ञानिकों का विचार है कि हमारे सौरमंडल की उत्पत्ति मंदाकिनी आकाशगंगा की ऐरावत नाम कि भूजा में हुई थी। आकाशगंगा की इस भूजा में एक हल्का ठंडी गैस का बादल था । इस बादल की मुख्य गैसों में हाइड्रोजन, हीलियम, ऑक्सीजन ऐव लोह इत्यादि थे। यह बादल धीरे-धीरे चक्कर लगाने लगा। तत्पश्चात उस बादल के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का पतन आरंभ हुआ और उसमें गैस के घूमते हुए चक्र उत्पन्न हुए । जीन के आंतरिक भाग का तापमान अत्याधिक था। गैस के यह डिस्क धीरे-धीरे ठंडे होकर सौरमंडल का रूप धारण कर गये। सूर्यके किरण को पृथ्वी पर पहोसनेमे 8 मिनिट ओर 20 सेकंड्स लगती है।


Tuesday, May 4, 2021

यूपीएससी की सामान्य माहिती

( इस पोस्ट में हम UPSC क्या है? इसे कैसे तैयार करें? UPSC परीक्षा कौन दे सकता है? UPSC की भर्ती । कब  आती र्है? UPSC पाठ्यक्रम क्या है? यूपीएससी भर्ती में कौन सी सेवा उपलब्ध है? आदि की माहिती देगे।

 👉 UPSC का पूरा नाम "संघ लोक सेवा आयोग" है। UPSC कक्षा 1 की परीक्षा लेता है।

👉 IAS, IPS, IFS, IRS जैसे अधिकारी बनने के लिए UPSC परीक्षा देनी होती है। यूपीएससी भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय इंजीनियरिंग सेवा जैसी सेवाओं की परीक्षा भी लेता है।

 👉UPSC परीक्षा तीन भागों में होती है।👈

           1)प्रारंभिक परीक्षा

           2) मुख्य परीक्षा

           3) साक्षात्कार

        

              🚥प्रारंभिक परीक्षा🚥

👉प्रारंभिक परीक्षा के दो पेपर होते हैं।

👉 दोनों पेपर 200 अंक के होते हैं।

 👉आपके पेपर की जाँच केवल तभी की जाती है जब आपको पेपर 2 में 33% या उससे अधिक अंक मिलते हैं।

 👉मेरिट आपके पेपर 1 के आधार पर बनता है । कि आप मुख्य परीक्षा दे सकते हैं या नहीं।

  (दूसरे पेपर के अंक नहीं गिने गए)

 👉 एक महीने के बाद परिणाम आता है, यदि आपके पास पहले पेपर में अच्छे अंक हैं, तो आप मुख्य परीक्षा दे सकते हैं।

 👉प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के अंक अंतिम परिणाम में नहीं गिने जाते हैं।


                      ✍️मुख्य परीक्षा ✍️

 ✍️मुख्य परीक्षा में कुल 9 पेपर होते हैं।

 ✍️अंग्रेजी (सभी उम्मीदवारों के लिए सामान्य, पास होने के लिए आवश्यक 300 में से 75 अंक)

 ✍️ दूसरा पेपर भाषा पर है, (आप संविधान की 8 वीं अनुसूची में 22 भाषाओं में से जो चाहें चुन सकते हैं। )

✍️ इन दोनों पेपर में पास होना आवश्यक है। इसके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं गिने जाते हैं।

 ✍️ मुख्य परीक्षा में जिस पेपर के अंकों को माना जाता है ।वो निम्नानुसार हैं ।

 ✍️निबंध का पेपर

 👉चार सामान्य अध्ययन से ४ पेपर

 👉 दो वैकल्पिक का पेपर

 (यूपीएससी द्वारा तय किए गए विषय से, जो विषय आपको तय करना है, वह भाषा आपके पास नहीं है, भाषा भी रखी जा सकती है)

 ✍️सात प्रश्नपत्र 250 अंकों के होते हैं।

  👉परिणाम 6 महीने के बाद आता है। यदि आप पास होते हैं, तो आपको साक्षात्कार के लिए बोलाया जाएगा (जिसके लिए आपको दिल्ली जाना है)।


                        👩‍💼साक्षात्कार👩‍💼

  👉साक्षात्कार कुल 275 अंक का होता हैं।

 👉साक्षात्कार में अपने स्नातक के मुख्य विषय, देश की समस्या और इसके समाधान, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, जिला या तालुका के बारे में प्रसिद्ध है, जिसमें से आप आते हैं? इसका इतिहास आदि क्या है, धर्म आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

 (यूपीएससी पास कर चुके अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर समय आप विस्तृत आवेदन पत्र  से सवाल पूछ रहे हैं)

 👉कुल 2025 अंकों में से, उम्मीदवार को अंक मिलते हैं।

 👉 फिर यूपीएससी उनका कैडर तय करता है कि आपको कौन सी सेवा देनी है।

 👉अगर आपके अंक अच्छे हैं तो आपको पसंदीदा कैडर मिलता है।


         UPSC की तैयारी कहाँ से शुरू करें? 

 👉UPSC की तैयारी NCERT से शुरू करनी चाहिए ताकि आपका मूल ज्ञान स्पष्ट हो।


               इतिहास 

 👉 9 से 12 NCERT पढ़नी जाए।

 👉प्राचीन भारत का इतिहास

 👉मध्य भारत का इतिहास

 👉आधुनिक भारत का इतिहास पढ़ें।


                भूगोल 

  👉 9 वीं से 12 वीं तक की NCERT किताब पढ़ें।

  👉रेड करेंट अफेयर्स

  👉भूगोल पर एक अच्छी पुस्तक पढ़ें


             अर्थशास्त्र 

  👉9वी से 12वी तक की NCERT पढ़े।

  👉अर्थशास्त्र पर रमेश सिंह की पुस्तक पढ़ें

  👉वर्तमान मामलों को पढ़ना

  👉यूट्यूब पर मृणाल पटेल का व्याख्यान देखें


          राजनीति विज्ञान

   👉 5 वीं से 12 वीं तक की NCERT पढ़े।

   👉 एम। लक्ष्मीकांत की राजनीति विज्ञान की पुस्तक।

   👉करेंट अफेयर्स देखे।

            समाजशास्त्र  

   👉9 से 12 NCERT पढ़े।

   👉समशस्त्र की एक अच्छी पुस्तक पढ़ना (सरल भाषा में जिसे आप समझ सकते हैं)


                विज्ञान 

   👉6 से 10 NCERT पढ़े।

   👉करेंट अफेयर्स पढ़े।


            मैथ्स के लिए

    👉8 से 10 तक की NCERT पढ़े। 

(गणित का सामान्य ज्ञान होना चाहिए, केवल दस तक)

          अंग्रेजी के लिए

 अंग्रेजी में दस तक व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है। UPSC में,300 अंकों का एक पेपर अंग्रेजी में आता है। मुख्य परीक्षा में, 300 में से 75 अंकों को पास करना आवश्यक होता है, यानी 300 अंकों में से 75 अंक। इन अंकों को अंतिम परीक्षा में नहीं गिना जाता है।

       वैकल्पिक विषय के लिए

 👉 ऑप्शनल के दो पेपर होते हैं।

 👉 कई वैकल्पिक हैं। 


       सामान्य क्या पढ़ना जहिए

 👉दैनिक समाचार पत्र पढ़ना

 👉6 महीने की वर्तमान पत्रिका पढ़ें

 👉आप जो भी पढ़ते हैं उसे नोट करें ताकि आप उसे परीक्षा के करीब से संशोधित कर सकें।

 👉केंद्र सरकार और राज्य सरकार की सभी योजनाओं को जानें।

 👉यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध क्या हैं, उनके बीच क्या समझौता है।

 👉भारत की मुख्य समस्या क्या है? उसके बारेमे जाने और उसको निपटाने के लिए क्या करना जाइए वो जाने।


      UPSC फॉर्म कौन भर सकता है?

  👉UPSC फॉर्म भरने के लिए आपकी आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।

  👉आपका ग्रेजुएशन पूरा हो जाना चाहिए। (यदि आप अंतिम सेम में हैं तो आप फॉर्म भर सकते हैं लेकिन अगर आपका इंटरव्यू आता है तो आपको ग्रेजुएशन मार्क लिखना होगा। यदि आप मार्कशीट प्राप्त कर लेते हैं तो फॉर्म भरा जा सकता है।)

  👉किसी भी विषय में स्नातक कर चुके छात्र फॉर्म भर सकते हैं।


     

                 🙏🙏 धन्यवाद 🙏🙏



नाबार्ड (NABARD)

✍️ इस लेख में हम नाबार्ड का परिचय,भारत में नाबार्ड किस तरीके से आया,नाबार्ड की स्थापना,नाबार्ड की प्रबंधन व्यवस्था,नाबार्ड की स्थापना के मुख...