इस पोस्ट में हम सार्क सम्मेलन के बारे में जानेंगे। सार्क सम्मेलन की स्थापना,सदस्य देश,इसकी विशिष्ट निकाई, सार्क के मुख्य केंद्र, भारत का उसमें क्या रोल है,सार्क सम्मेलन के शिखर सम्मेलन के बारे में और भारत को क्यों सार्क सम्मेलन फिर से शुरू करना चाहिए उसके बारे में हम जाने गै,सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।
सार्क सम्मेलन क्या है।
द्वितीय विश्वयुद्ध ई.स 1945 के बाद विश्व की राजनीति में बहुत बदलाव आए। इसके परिणाम स्वरूप क्षेत्रीय संगठनों का गठन हुआ जो समान हीतो और अधिक भौगोलिक स्थिति से जुड़े हैं और उसने कई क्षेत्रीय संगठनों को जन्म दिया जिसमें से हम सार्क सम्मेलन/संगठन की बात करेंगे।
सार्क एक क्षेत्रीय संगठन हैं और सार्क का मुख्य विचार दक्षिण एशिया राज्यों के सहयोग के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों को इस्तेमाल करके लोगों के कल्याण में बढ़ावा करना,उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना,आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए और सदस्य देशों में शांति सद्भाव स्थापित करना ईस उद्देश्य से ए सम्मेलन प्रारम्भ किया गया है। SAARC full from (the South Asian association of regional cooperation)दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन.
सार्क सम्मेलन की स्थापना और उसके सदस्य देश
सार्क सम्मेलन की स्थापना 8 दिसंबर,1985 को ढाका,बांग्लादेश में हुई थी और उसके बाद 16 जनवरी 1987 के सचिवालय की स्थापना नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई थी।
सार्क सम्मेलन में पूरे विश्व की 21% आबादी और 3% भौगोलिक क्षेत्र का समावेश होता है और उसके साथ यह सम्मेलन विश्व की अर्थव्यवस्था का 4.21% हिस्सा रखता है।
इस सम्मेलन में सदस्य देशों से व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए। 1.6 अरब अरब लोगों का मुक्त व्यापार केंद्र बनाया गया ता की सभी वस्तुओं के सदस्य देशों में कर कम किया जा सके और उस को सफल करने के लिए जनवरी 2006 को साफ्टा समझौता हुआ वह 8 सदस्य देशों के अनुसमर्थन के बाद प्रारंभ किया गया।
सदस्य देश
सार्क सम्मेलन की स्थापना के वक्त निम्नलिखित देश शामिल थे।
जिसमें...
👉बांग्लादेश
👉भूटान
👉भारत
👉मालदीव
👉नेपाल
👉पाकिस्तान
👉श्रीलंका
इस देशों का समावेश होता था।
और उसके बाद अप्रैल,2007 को अफगानिस्तान नए सदस्य के रूप में शामिल हुआ। वर्तमान में सार्क सम्मेलन में 8 सदस्य देश शामिल हैं।
और सार्क सम्मेलन में 9 पर्यवेक्षक सदस्य देश है जिसमें.....
👉ऑस्ट्रेलिया
👉चीन
👉यूरोपियन यूनियन
👉ईरान
👉जापान
👉रिपब्लिक ऑफ कोरिया
👉मॉरिशस
👉म्यानमार
👉संयुक्त राज्य अमेरिका
सार्क सम्मेलन की मुख्य निकाय
(1) सार्क विकास कोष (SDF)
👉इस संस्था का सचिवालय थिंफू भूटान में स्थित है।
👉इस संस्था का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में सहयोग आधारित परियोजनाओं का वित्तपोषण करना है। जेसे की..... विकास,गरीबी अनमूलन यादी।
(2) दक्षिण एशियाई मानक संगठन (SARSO)
👉इस संस्था का सचिवालय बांग्लादेश के ढाका में स्थित है।
👉इस संस्था की स्थापना सार्क के सदस्य देशों के बीच मध्यस्थ समन्वय और सहयोग बढ़ाने के लिए की गई है।
(3) सार्क मध्यस्थ परिषद
👉यह संस्था का सचिवालय इस्लामाबाद,पाकिस्तान में स्थित है।
👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के वाणिज्य, औद्योगिक, व्यापारिक, बैंकिंग जैसे कार्य के विवाद को निपटाने के लिए एक कानून बनाती है।
(4) दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय
👉यह संस्था का सचिवालय नई दिल्ली भारत में स्थित है।
👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के बीच अभ्यास को बढ़ावा देती हैं।
संगठन का कार्य क्षेत्र
👉 मानव संसाधन विकास एवं पर्यटन इस्लामाबाद,पाकिस्तान
👉 कृषि एवं ग्रामीण विकास–ढाका,बांग्लादेश
👉 पर्यावरण, प्राकृतिक आपदा एवं बायोटेक्नोलॉजी–गांधीनगर,भारत
👉 आर्थिक,व्यापार एवं वित्त–थिंफू–भूटान
👉 सामाजिक मुद्दे–कोलंबो,श्रीलंका
👉 सूचना एवं गरीबी उन्मूलन–काठमांडू,नेपाल
👉 ऊर्जा,परिवहन विज्ञान एवं प्रौद्योगिक–इस्लामाबाद, पाकिस्तान
👉 सार्क से रोग एवं (HIV)–काठमांडू,नेपाल
👉 सार्क दस्तावेजकरण – नई दिल्ली,भारत
भारत का सार्क सम्मेलन में क्या रोल है।
India policy neighborhood first, global leadership & role act East policy पे भारत काम करता है और वह सार्क सदस्य देशों में सबसे ज्यादा वस्ती का देश है इसलिए वह बिग ब्रोधर का कार्यकर्ता है।
सार्क के शिखर सम्मेलन
1) 7–8 दिसंबर, 1985 बांग्लादेश , ढाका अफौर रहमान खान.
2) 16–17 नवंबर 1986 भारत , बेंगलुरु राजीव गांधी
3)2–4 नवंबर 1987 नेपाल,काठमांडू king Birendra bir Bikram Shah
4) 29–31 दिसंबर 1986 पाकिस्तान,इस्लामाबाद बेनज़ीर भुट्टो
18) 26-27 नवंबर 2014–नेपाल,काठमांडू –सुशील कोलराला ।
19) 15–16 नवंबर 2016–पाकिस्तान, इस्लामाबाद–भारत के विरोध से बंध।(भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती)
भारत के लिए क्यों सार्क सम्मेलन जरूरी है।
👉पड़ोसी देश: –सार्क सम्मेलन के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास को शांति स्थापना में सहयोग कर सकता है ।
👉भू–रणनीतिक महत्व :–भारत विकास प्रक्रिया और सहयोग से नेपाल,भूटान,मालदीव और श्रीलंका को अपनी ओर आकर्षित करके चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला और चीन के वन बेल्ट एंड वन रोड कार्यक्रम का विरोध कर सकता है।
👉 वैश्विक नेतृत्व की भूमिका :–सार्क सम्मेलन भारत को अंतरिक्ष जिम्मेदारियां लेकर क्षेत्र में अपने प्रभाव से विश्व में एक अच्छी सांप स्थापित कर सकता है।
👉भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए महत्वपूर्ण :– दक्षिणी एशियाई अर्थव्यवस्था को दक्षिण पूर्व एशिया के साथ लिंक कर के मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में भारत के लिए आर्थिक एकीकरण और समुध्धि में आगे लाया जा सकता है।
👉Covid–19 महामारी :–covid–19 महामारी पूरी दुनिया मेंं फैली हुई है और जिसमें भारत दक्षिण एशियाई देशों के साथ खड़ा है और भारत को दक्षिण एशिया देशों से काफी मदद भी मिल रही है।जिससे भारत का विश्व लेवल पर प्रभाव बढ़ेगा।
सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।
(1) भारत और पाकिस्तान के संबंध
👉भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर केंद्रित विवाद है।
👉भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव और संघर्ष ने सार्क के समझौते को कम किया है।
(2) अंशुल जैसी मां और समुद्री मुद्दे
👉इसमें भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के वितरण का विवाद
👉भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी के जल वितरण पर केंद्रित और कुछ हाल ही में विवाद सीमाक्षेत्र पर दिखाया जा सकता है। जैसे काला पानी और लिपुलेख विवाद।
(3) विश्वास की खोट बिग ब्रदर सिंड्रोम
👉सामूहिक निर्भरता और सदस्यों के पारस्परिकता के बीच अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
(4) कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता
👉दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं के बीच आम सहमति तक पहुंचना बहुत मुश्किल है क्योंकि उनकी राजनीतिक प्रणाली बहुत अलग है। उदाहरण के रूप में भारत में संघ संसदीय लोक प्रणाली हैं।भूटान में एक संवैधानिक राजतंत्र है और नेपाल में एक राजाशाही शासन प्रणाली है।
(5) आतंकवाद और चीन कारक
👉पाकिस्तान विभिन्न आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। और उसके लिए भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती। शक्तिकांत देशों ने भारत की इस बात का समर्थन किया। सार्क सम्मेलन के देश आज चीन की तरफ खिसने लगे हैं।
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