Upsc Important Topics
Thursday, July 8, 2021
नाबार्ड (NABARD)
Saturday, July 3, 2021
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
👉इस लेख में हम भारत में मध्यस्थ बैंक की शुरुआत, उसका राष्ट्रीयकरण, प्रतिक, RBI के क्षेत्रीय कार्यालय एवं शाखाए,RBI की संरचना, RBI के गवर्नर, गवर्नर की नियुक्ति,कार्यकाल एवं आरबीआई के कार्यों के बारे में जानें गै।
✍️भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। एवं भारत के सभी बैंकों का संचालक और रिजर्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्तित करता है।
✍️शरुआत में यह एक प्राइवेट बैंक चार्जेस का राष्ट्रीयकरण भारत सरकार द्वारा सन् 1949 में किया गया जिसके बाद यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व वाली बैंक बन गई।
✍️मुद्रा की छपाई के मामले में भारत में RBI का एकाधिकार है। (1₹ की नॉट और सिक्के को छोड़कर जिसकी छपाई भारत सरकार के पास है)
भारत में मध्यस्थ बैंक की शुरुआत
👉भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उत्पन्न हुई आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए किया गया था।
👉सन 1920 में हिल्टन यंग कमिशन ( Hilton young Commission) (जिसे रॉयल कमिशन के नाम से भी जाना जाता है) बनाई गया । यह देश में एक मध्यस्थ बैंक की स्थापना के लिए बनाया गया था बाद में सन 1926 में यह मंडल ने एक रिपोर्ट दिया इसकी सिफारिशें इंग्लैंड में RBI ACT–1934 पास हुआ।
👉और 1 अप्रैल 1935 को RBI की स्थापना की गई एवं इसके प्रथम गवर्नर के रूप में ऑस्वॉर्न स्मिथ (1935–37)को रखा गया। और उसके बाद प्रथम भारतीय गवर्नर C.D देशमुख (1943–45) थे।
👉RBI की स्थापना में डॉ.भीमराव अंबेडकर जी ने अहमद भूमिका निभाई है उनके द्वारा प्रदान किए गए दिशा-निर्देशों या निर्देशक सिद्धांत के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक बनाई गई थी।
👉RBI के दिशा–निर्देश कार्यप्रणाली एवं दृष्टिकोण डॉ.बी.आर अंबेडकर की पुस्तक "the problem of the rupee, its original and its solution"की अवधारणाओं पर आधारित थी।
RBI का राष्ट्रीयकरण
प्रारंभ में RBI एक प्राइवेट बैंक थी। जिसकी शुरुआत 5 करोड़ के मुड़ीरोकाण से हुई थी और यहां पूंजी प्राइवेट शेरहोल्डर द्वारा लगाई गई थी।
देश की आजादी के बाद 1 जनवरी 1949 में RBI का राष्ट्रीयकरण हुआ। उस समय RBI के गवर्नर C.D देशमुख थे।
प्रतीक
RBI के प्रतीक में ताड़का वृक्ष एवं बंगाली बाघ रखा गया है।
RBI के क्षेत्रीय कार्यालय एवं शाखाएं
भारतीय रिजर्व बैंक के 4 क्षेत्रीय कार्यालय,27 स्थानिक कार्यालय एवं 4 उप कार्यालय हैं।
RBI के 4 क्षेत्रीयकार्यालय भारत के चारों क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जो निम्नलिखित है.....
1) नई दिल्ली 👉 उत्तर भारत
2) कोलकाता 👉 पूर्वी भारत
3) चेन्नई 👉 दक्षिण भारत एवं
4) मुंबई 👉 पश्चिम भारत
RBI की संरचना
RBI 21 सदस्यो वाले "केंद्रीय निदेशक बोर्ड" द्वारा संचालित होता है।
इस केंद्रीय निर्देशक बोर्ड का चेरमेन RBI का गवर्नर होता है।
केंद्रीय निदेशक बोर्ड के सदस्य के बारेमे निम्नलिखित है......
👉 1 गवर्नर तथा 4 deputy governor।
👉 4 क्षेत्रीय बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले चेरमेन।
👉 2 वित्तीय मंत्रालय की तरफ से व्यक्ति जो आम तौर पर “आर्थिक मामलों के सचिव” तथा “वित्तीय सेवाओं के सचिव” होते हैं।
👉 10 अन्य सरकार द्वारा नामित विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित निदेशक।
RBI के गवर्नर
👉भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर, भारतीय केंद्रीय बैंक (RBI) का मुख्य वर्ककर्मी होता है।
👉गवर्नर भारत के केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा उसके केंद्रीय निदेशक मंडल के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
👉RBI द्वारा जो भी नोट छापे जाते हैं उन पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
👉RBI के वर्तमान गवर्नर – शक्तिकांत दास (25 में गवर्नर )
RBI के गवर्नर की नियुक्ति
✍️RBI ACT–1934 के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर को केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
✍️गवर्नर की योग्यता के संबंध में अधिनियम में कोई शर्त नहीं दी गई है।
✍️प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्तीय मंत्रालय तथा रिटायर होने वाले गवर्नर से सलाह लेकर नए गवर्नर का चुनाव होता है।
✍️“कैबिनेट समिति” जो गवर्नर की नियुक्ति से संबंधित निर्णय को लेती है। उसके अनुसार गवर्नर की नियुक्ति FSRASC की सिफारिशों पर आधारित होती है । जिसका अध्यक्ष “कैबिनेट सचिव” होता है।
✍️गवर्नर को केंद्र सरकार के महाभियोग द्वारा हटाया जाता है।
✍️जब गवर्नर अनुपस्थित होते हैं तो वह स्वयं एक डिप्टी गवर्नर को नामित करता है जो केंद्रीय बोर्ड के चेयरमैन के रूप में कार्य करता है।
✍️गवर्नर और डिप्टी गवर्नर दोनों की पुनः नियुक्ति की जा सकती है एवं कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है। (सामान्य 3 वर्ष – महत्म – 5 वर्ष)
RBI के गवर्नर का कार्यकाल
👉“भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934”, खंड 8 (4) गवर्नर एवं डिप्टी गवर्नर के कार्यकाल के संबंध में बताया है जिसके अनुसार......
👉“गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर उस अवधि के लिए नियुक्त किए जाएंगे जो 5 वर्ष से ज्यादा नहीं होगा। इसका निर्धारण केंद्र सरकार नियुक्ति के समय कर सकेंगे तथा यह पुनः नियुक्त के योग्य होगे।”
👉अर्थात गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर का कार्यकाल नियुक्ति के समय केंद्र सरकार निर्धारित करेंगी जो कि 5 वर्षों से अधिक नहीं होता है।
RBI का कार्य
1) मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वयन और निगरानी करना।
👉अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति तैयार की जाती है।
👉जिसमें RBI – SLR,CRR,Repo Rate, reverse repo rate,bank rate जैसे मौद्रिक नीति के साधनों के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था में महंगाई और मंदी को स्थिर करता है।
👉वर्ष में 6 बार मौद्रिक नीति का निर्धारित किया जाता है मतलब 2 महीनों में एक बार।
👉उद्देश्य – मूल्य स्थिरता बनाए रखना और उत्पादन क्षेत्र को पर्याप्त रूम उपलब्धता को सुनिश्चित कराना।
2) वित्तीय प्रणाली का विनिमय एवं पर्यवेक्षण करना।
✍️बैंकिंग परिचालन के लिए विस्तृत मापदंड निर्धारित करना जिसके अंतर्गत देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली काम करती है।
✍️उद्देश्य – बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना जमा कर्ताओं के हितों की सुरक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना।
3) विदेशी मुद्रा का प्रबंध
👉विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 का प्रबंध करता है।
👉भारत में विदेश से तीन प्रकार की मुद्रा प्राप्त होती है। जिसमें विदेशी मुद्रा,सोनू और SDR (पेपर सोनू) का समावेश होता है।
👉भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्राओ को खरीदता और बेचता है। और देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा भी करता है।
👉उद्देश्य– विदेश व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का विकास करना और उसे बनाए रखना।
4) मुद्रा जारी करना,उसका विनिमय करना और परिचालन योग्य न रहने पर उसका नष्ट करना।
✍️RBI ACT - 1934 - के अनुसार ₹2 से लेकर ₹10,000 तक के नोट छापने का अधिकार RBI को हैं।
✍️वर्तमान में ₹2 से ₹2000 तक का नोट छापा जाता है।
✍️“सरकार हर नोट को छापने के लिए उसके बराबर का सोना या संपत्ति RBI के पास जमा करती है। तब RBI उसके मूल्य के बराबर नोट छापता है। उस पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।”
✍️नोट छापने के लिए न्यूनतम आरक्षित प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
✍️न्यूनतम आरक्षित प्रणाली में 200 करोड़ पूंजी आवश्यकता हो तो नोट छापे जाते हैं।
✍️जिसमे 85 नकद या विदेशी मुद्रा और 115 करोड़ का सोना होना चाहिए तो RBI नोट छाप सकती है।
✍️नोट छापने के लिए RBI स्वतंत्र नहीं है।
✍️RBI के छापखाने से केश में ₹ व्यापारी बैंकों के पास अथवा सरकार के पास पहुंचता है । व्यापारी बैंकों के पास से अन्य ग्राहकों के पास पहुंचता है। और जो सरकार के पास गया वह विविध योजनाओं के तहत लोगों को मिलता है।
✍️और जो नोट सड़ गई या टूट गई वह RBI के पास वापस आती है और वह RBI नष्ट कर देता है।
5) सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करना
👉RBI अधिनियम की शर्तों में रिजर्व बैंक को केंद्रीय सरकार की प्राप्ति और भुगतान एवं विनिमय प्रेषण और अन्य बैंकिंग गतिविधियां का उत्तरदायित्व संभालता है।
👉रिजर्व बैंक को भारत में सरकारी कारोबार करने का अधिकार है। वह सरकार के बॉन्ड या अन्य सरकारी जमिनगिरि बेचने और खरीदने का कार्य करता है।
👉अधिनियम के अनुसार राज्य सरकारों के साथ करार कर,भारतीय रिजर्व बैंक राज्य सरकार के साथ लेनदेन कर सकता है।
👉भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र और राज्य सरकारों के प्रमुख खाते रखता है।
👉भारतीय रिजर्व बैंक ने पूरे भारत में सरकार की ओर से राजस्व संग्रह करने के साथ-साथ भुगतान करने के लिए संचालित व्यवस्था करता है।
6) बैंको के बैंक एवं बैंक के रूप में कार्य करना।
✍️RBI सभी “अनुसूचित बैंको एवं व्यापारी बैंकों” के बैंक रखता है। जैसे हमारा खाता बैंक में होता है वैसे ही बैंक का खाता RBI में होता है।
✍️RBI बैंकों की ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है।
बैंक की ₹5 लाख तक जमा राशि पर बीमा सुविधा।
✍️2020–21 के बजट में बीमा सुविधाएं 1 लाख से बढ़ा कर 5 लाख ₹ करदी।
7) साख नियंत्रण करना
👉प्रारंभिक जमा के आधार पर कई गुना जमा का सर्जन कर देना ही साख निर्माण कहलाता है। यह और अर्थतंत्र में फुगावे की स्थिति रूपांतरित कर सकता है।
👉जिसके लिए RBI साख नियंत्रण करती है। जो “मुद्रा की मात्रा को नियंत्रण करना ही साख नियंत्रण कहलाता है।” इसे मौद्रिक नीति भी कहते हैं।
इसका नियंत्रण दो प्रकार से होता है........
1) मात्रात्मक नियंत्रण एवं
2) गुणात्मक नियंत्रण।
8) मुद्रा की लेनदेन को नियंत्रण करना
👉RBI भारत की अर्थव्यवस्था में मुद्रा के लेन-देन को नियंत्रित करने का काम करता है।
👉जैसे के अर्थव्यवस्था में मुद्रा बढ़ गई हो तो उसे घटाए गा अगर जो मुद्रा घट गई हो तो उसे बढाएंगा।
👉उस तरह से RBI भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी या फुगावे से बचाता है।
9) विकासात्मक भूमिका
✍️सरकार को समय-समय पर RBI विकास से संबंधित सलाह देता है और आर्थिक नीतियों के निर्माण में RBI द्वारा सहायता की जाती है।
✍️वित्तीय संस्थाओं की मजबूती के लिए विविध उपयोको RBI द्वार आजमाया जाता है।
Monday, June 28, 2021
मनरेगा योजना
✍️ इस लेख में हम आपको मनरेगा योजना के बारे में बताएंगे जैसे के...... मनरेगा योजना क्या है? भारत में इस योजना लाने की आवश्यकता क्यों हुई। मनरेगा की शुरुआत कब और कहा से हुई। इस योजना को किन–किन योजनाओं को जोड़कर बनाया गया है। इस योजनाका उद्देश्य। एस्मे पंजीकरण कैसे करें। इस योजना के प्रावधान। इस योजना का भुगतान कौन करेगा। इस योजना के अंतर्गत कोन से कार्य करने पड़ते है एवं इस योजना की उपलब्धियां के बारे में जाने गै।
नरेगा योजना (मनरेगा) क्या हैं।
यहां एक अधिनियम है । जिसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त नेतृत्व से चलाया जाता है और यह योजना ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भाग प्रदान करती है। जब यह लागू हुआ तब उसका नाम नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) था बाद में 2अक्टूबर,2009 में इसका नाम बदलकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कर दिया गया।
भारत में यह योजना की आवश्यकता क्यों हुई।
भारत में अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण इलाकों में बसती है ।और उसको ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार न मिलने से वह लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं । इस पलायन के कारण शहरों में भी बेरोजगारी बढ़ती थी । इसलिए उसको रोकने के लिए और ग्रामीण विकास को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना प्रारंभ की हैं।
मनरेगा योजना(नरेगा) की भारत में शुरुआत
नरेगा की शुरुआत जीन ड्रेस (बेल्जियम के अर्थशस्त्री) की उपज थी।
25 अगस्त 2005 को संसद में नरेगा के संबंध में अधिनियम प्रसार हुआ और तब भारत के वडाप्रधान डॉ.मनमोहन सिंह थे।
इसके बाद यह अधिनियम को 2 सितंबर 2005 को संसद द्वारा पारित किया गया।
उसके बाद 2 फरवरी 2006 को यह आंध्रप्रदेश के बांदावाली जिले के अनंतपुर गांव से उसकी शुरुआत हुई उसके साथ यहां 200 पचात जिले में लागू किया गया। इसके एक वर्ष के बाद उसमें 103 जिले और जोड़़े गए ।
एवं 1 अप्रैल 2008 को भारत के उस समय मौजूद 593 जिलो (समग्र भारत) में लागू कर दिया गया।
इस योजना का नाम परिवर्तन
2 अक्टूबर 2009 को गांधी जयंती दिन को इसका नाम बदलकर– मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कर दिया गया।
किन-किन योजनाओं को जोड़कर यह योजना बनाई गई है।
यह योजना 2 योजनाओं को जोड़कर बनाई गई है। जो निम्नलिखित है।
1) संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना।
यह योजना को लेकर 15 अगस्त, 2001 को PM ने लाल किले पर घोषणा की। की हम ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के लिए एक योजना लाएंगे और यह योजना की शरुआत 25 सितंबर 2001 को UP के मथुरा जिले के करद गांव से शुरू किया गया।
यहां योजना में दो दूसरी योजना भी समाविष्ट होती थी जिसमें....1) रोजगार आश्वासन योजना और 2) जवाहर ग्राम समृद्धि योजना थी।
2) काम के लिए अनाज योजना।
मनरेगा का मुख्य उद्देश्य।
👉पहले उसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के पलायन को कम करना था।
👉ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार प्रदान करना।
👉ग्रामीण क्षेत्र का विकास।
👉एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की कार्यशक्ति को बताना था।
मनरेगा के अंतर्गत पंजीकरण कैसे करें।
फॉर्म 👉 डॉक्यूमेंट (जन्म प्रमाण पत्र + आधार कार्ड + फोटो + पता) 👉 ग्राम पंचायत 👉 पंजीकरण 👉 जॉब कार्ड मिलेगा।
इसकी भुगतान बैंक या डाक एवं नकद(सिफारिशसे)
मिलेंगी।
इस योजना का प्रावधान
👉हर एक परिवार के व्यस्त सदस्य जो कुशल और अर्ध–कुशल हो उसे वित्तीय वर्ष के दौरान 100(किस राज्य में 150 दिन का भी है) दिन का रोजगार दिया जाएगा।
👉अगर आवेदन करने के 15 दिन के बाद रोजगार नहीं मिला तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
👉आवेदन कर्ता को जॉब कार्ड दिया जाएगा।
👉33% महिला को अनामत दिया जाएगा।
👉सप्ताह में 6 दिन के कार्य दिवस।
👉दिन में 7 घंटे कार्य समय सीमा।
👉अगर जो कार्य स्थल निवास स्थान के 5 k.m दायरे से अधिक दूर होगा तो 10% मजदूरी बढ़ाई जाएगी।
👉अगर कार्य के दौरान आपके साथ कुछ अनहोनी हो जाती है। तो उसको केंद्र सरकार राशि देंगी।
इस योजना का भुगतान कौन करेगा।
👉केंद्र सरकार इस योजना में 90% खर्च करेंगी और राज्य सरकार 10% खर्च करेंगी।
उदाहरण के तौर पर: – अगर 100 करोड़ की ग्रांट आती है। तो उसमें से 90 करोड़ केंद्र सरकार खर्च करेंगी और 10 करोड रज्य सरकार खर्च करेंगे।
👉इस योजना के अंतर्गत सभी साधन केंद्र सरकार देंगी।
👉एवं इस योजना का नेतृत्व ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्य
👉कार्य मुख्यतव शारीरिक क्षमता पर आधारित होगा जिसमें....
👩🔧जल संरक्षण एवं संचयन कार्य।
👩🔧छोटे बांधों का निर्माण।
👩🔧तालाब की खुदाई।
👩🔧बंजर जगह पर वनीकरण।
👩🔧भूमि विकास।
👩🔧ग्रामीण संपर्क मार्ग निर्माण।
इस योजना की उपलब्धियां
✍️विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक कल्याण कार्यक्रम।
✍️गरीबी कम हुई।
✍️2015 को world Bank ने उसको सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना जारी किया।
✍️18–30 वर्ष के लोगों की भागीदारी बढ़ गई।
✍️14.36 घरों मनरेगा पर निर्भर हैं।
Thank you
Wednesday, June 16, 2021
HDI(Human Development Index)
👉इस लेख में हम मानव विकास अहेवाल कैसे लाया गया ।मानव विकास का अर्थ। मानव विकास सूचकांक के घटक। मानव विकास सूचकांक कैसे प्राप्त होता है और 2020 के मानव विकास सूचकांक के बारे में जाने गै।
✍️मानव विकास सूचकांक अवधारणा का विकास पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब–उल–हक द्वारा किया गया था। इस अवधारणा का बाद में 1990 में भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (नोबेल पारितोषिक) द्वारा समर्थन किया गया।
✍️बाद में UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम,स्थापना– 1965 मुख्यालय– न्यूयॉर्क) ने पहली बार 1990 में मानव विकास रिपोर्ट जारी की जिसमें मानव विकास सूचकांक का अर्थ और मानव विकास सूचकांक शामिल थे।
✍️मानव विकास रिपोर्ट 1990 के मुताबिक मानव विकास का अर्थ:–
"मानव विकास का अर्थ है लोगों की पसंदगी को बढ़ाना ।महत्वपूर्ण विकल्पों में एक अच्छा और किफायती जीवन होना। ज्ञान प्राप्त करने में सक्षम होना और एक अच्छा जीवन स्तर प्राप्त करने के लिए संसाधनों का उपयोग करने का अवसर प्राप्त करना है।"
✍️मानव विकास सूचकांक में निम्नलिखित धटको का समावेश होता है।
👉ज्ञान: –
1) स्कूल के अपेक्षित वर्ष।
2) स्कूल के औसत वर्ष।
👉लंबा और स्वस्थ जीवन:–
1)औसतन जिंदगी।
👉जीवन का एक सभ्य मानक:–
1) प्रति व्यक्ति आय (per capital income)
✍️मानव विकास आंक प्राप्त कैसे होता है।
मानव विकास आंक प्राप्त करने के लिए महत्तम मूल्य और लघुत्तम मूल्य निश्चित किया जाता है जो निम्नलिखित कोष्टक के अनुसार है।
👉परीमाणआंक=
वास्तविक मूल्य – लघुतम मूल्य
Tuesday, June 8, 2021
GST (वस्तु एवं सेवा कर)
Wednesday, May 26, 2021
सार्क सम्मेलन (SAARC)
इस पोस्ट में हम सार्क सम्मेलन के बारे में जानेंगे। सार्क सम्मेलन की स्थापना,सदस्य देश,इसकी विशिष्ट निकाई, सार्क के मुख्य केंद्र, भारत का उसमें क्या रोल है,सार्क सम्मेलन के शिखर सम्मेलन के बारे में और भारत को क्यों सार्क सम्मेलन फिर से शुरू करना चाहिए उसके बारे में हम जाने गै,सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।
सार्क सम्मेलन क्या है।
द्वितीय विश्वयुद्ध ई.स 1945 के बाद विश्व की राजनीति में बहुत बदलाव आए। इसके परिणाम स्वरूप क्षेत्रीय संगठनों का गठन हुआ जो समान हीतो और अधिक भौगोलिक स्थिति से जुड़े हैं और उसने कई क्षेत्रीय संगठनों को जन्म दिया जिसमें से हम सार्क सम्मेलन/संगठन की बात करेंगे।
सार्क एक क्षेत्रीय संगठन हैं और सार्क का मुख्य विचार दक्षिण एशिया राज्यों के सहयोग के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों को इस्तेमाल करके लोगों के कल्याण में बढ़ावा करना,उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना,आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए और सदस्य देशों में शांति सद्भाव स्थापित करना ईस उद्देश्य से ए सम्मेलन प्रारम्भ किया गया है। SAARC full from (the South Asian association of regional cooperation)दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन.
सार्क सम्मेलन की स्थापना और उसके सदस्य देश
सार्क सम्मेलन की स्थापना 8 दिसंबर,1985 को ढाका,बांग्लादेश में हुई थी और उसके बाद 16 जनवरी 1987 के सचिवालय की स्थापना नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई थी।
सार्क सम्मेलन में पूरे विश्व की 21% आबादी और 3% भौगोलिक क्षेत्र का समावेश होता है और उसके साथ यह सम्मेलन विश्व की अर्थव्यवस्था का 4.21% हिस्सा रखता है।
इस सम्मेलन में सदस्य देशों से व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए। 1.6 अरब अरब लोगों का मुक्त व्यापार केंद्र बनाया गया ता की सभी वस्तुओं के सदस्य देशों में कर कम किया जा सके और उस को सफल करने के लिए जनवरी 2006 को साफ्टा समझौता हुआ वह 8 सदस्य देशों के अनुसमर्थन के बाद प्रारंभ किया गया।
सदस्य देश
सार्क सम्मेलन की स्थापना के वक्त निम्नलिखित देश शामिल थे।
जिसमें...
👉बांग्लादेश
👉भूटान
👉भारत
👉मालदीव
👉नेपाल
👉पाकिस्तान
👉श्रीलंका
इस देशों का समावेश होता था।
और उसके बाद अप्रैल,2007 को अफगानिस्तान नए सदस्य के रूप में शामिल हुआ। वर्तमान में सार्क सम्मेलन में 8 सदस्य देश शामिल हैं।
और सार्क सम्मेलन में 9 पर्यवेक्षक सदस्य देश है जिसमें.....
👉ऑस्ट्रेलिया
👉चीन
👉यूरोपियन यूनियन
👉ईरान
👉जापान
👉रिपब्लिक ऑफ कोरिया
👉मॉरिशस
👉म्यानमार
👉संयुक्त राज्य अमेरिका
सार्क सम्मेलन की मुख्य निकाय
(1) सार्क विकास कोष (SDF)
👉इस संस्था का सचिवालय थिंफू भूटान में स्थित है।
👉इस संस्था का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में सहयोग आधारित परियोजनाओं का वित्तपोषण करना है। जेसे की..... विकास,गरीबी अनमूलन यादी।
(2) दक्षिण एशियाई मानक संगठन (SARSO)
👉इस संस्था का सचिवालय बांग्लादेश के ढाका में स्थित है।
👉इस संस्था की स्थापना सार्क के सदस्य देशों के बीच मध्यस्थ समन्वय और सहयोग बढ़ाने के लिए की गई है।
(3) सार्क मध्यस्थ परिषद
👉यह संस्था का सचिवालय इस्लामाबाद,पाकिस्तान में स्थित है।
👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के वाणिज्य, औद्योगिक, व्यापारिक, बैंकिंग जैसे कार्य के विवाद को निपटाने के लिए एक कानून बनाती है।
(4) दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय
👉यह संस्था का सचिवालय नई दिल्ली भारत में स्थित है।
👉यह संस्था सार्क सदस्य देशों के बीच अभ्यास को बढ़ावा देती हैं।
संगठन का कार्य क्षेत्र
👉 मानव संसाधन विकास एवं पर्यटन इस्लामाबाद,पाकिस्तान
👉 कृषि एवं ग्रामीण विकास–ढाका,बांग्लादेश
👉 पर्यावरण, प्राकृतिक आपदा एवं बायोटेक्नोलॉजी–गांधीनगर,भारत
👉 आर्थिक,व्यापार एवं वित्त–थिंफू–भूटान
👉 सामाजिक मुद्दे–कोलंबो,श्रीलंका
👉 सूचना एवं गरीबी उन्मूलन–काठमांडू,नेपाल
👉 ऊर्जा,परिवहन विज्ञान एवं प्रौद्योगिक–इस्लामाबाद, पाकिस्तान
👉 सार्क से रोग एवं (HIV)–काठमांडू,नेपाल
👉 सार्क दस्तावेजकरण – नई दिल्ली,भारत
भारत का सार्क सम्मेलन में क्या रोल है।
India policy neighborhood first, global leadership & role act East policy पे भारत काम करता है और वह सार्क सदस्य देशों में सबसे ज्यादा वस्ती का देश है इसलिए वह बिग ब्रोधर का कार्यकर्ता है।
सार्क के शिखर सम्मेलन
1) 7–8 दिसंबर, 1985 बांग्लादेश , ढाका अफौर रहमान खान.
2) 16–17 नवंबर 1986 भारत , बेंगलुरु राजीव गांधी
3)2–4 नवंबर 1987 नेपाल,काठमांडू king Birendra bir Bikram Shah
4) 29–31 दिसंबर 1986 पाकिस्तान,इस्लामाबाद बेनज़ीर भुट्टो
18) 26-27 नवंबर 2014–नेपाल,काठमांडू –सुशील कोलराला ।
19) 15–16 नवंबर 2016–पाकिस्तान, इस्लामाबाद–भारत के विरोध से बंध।(भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती)
भारत के लिए क्यों सार्क सम्मेलन जरूरी है।
👉पड़ोसी देश: –सार्क सम्मेलन के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास को शांति स्थापना में सहयोग कर सकता है ।
👉भू–रणनीतिक महत्व :–भारत विकास प्रक्रिया और सहयोग से नेपाल,भूटान,मालदीव और श्रीलंका को अपनी ओर आकर्षित करके चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला और चीन के वन बेल्ट एंड वन रोड कार्यक्रम का विरोध कर सकता है।
👉 वैश्विक नेतृत्व की भूमिका :–सार्क सम्मेलन भारत को अंतरिक्ष जिम्मेदारियां लेकर क्षेत्र में अपने प्रभाव से विश्व में एक अच्छी सांप स्थापित कर सकता है।
👉भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए महत्वपूर्ण :– दक्षिणी एशियाई अर्थव्यवस्था को दक्षिण पूर्व एशिया के साथ लिंक कर के मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में भारत के लिए आर्थिक एकीकरण और समुध्धि में आगे लाया जा सकता है।
👉Covid–19 महामारी :–covid–19 महामारी पूरी दुनिया मेंं फैली हुई है और जिसमें भारत दक्षिण एशियाई देशों के साथ खड़ा है और भारत को दक्षिण एशिया देशों से काफी मदद भी मिल रही है।जिससे भारत का विश्व लेवल पर प्रभाव बढ़ेगा।
सार्क सम्मेलन की मुख्य समस्याएं।
(1) भारत और पाकिस्तान के संबंध
👉भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर केंद्रित विवाद है।
👉भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव और संघर्ष ने सार्क के समझौते को कम किया है।
(2) अंशुल जैसी मां और समुद्री मुद्दे
👉इसमें भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के वितरण का विवाद
👉भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी के जल वितरण पर केंद्रित और कुछ हाल ही में विवाद सीमाक्षेत्र पर दिखाया जा सकता है। जैसे काला पानी और लिपुलेख विवाद।
(3) विश्वास की खोट बिग ब्रदर सिंड्रोम
👉सामूहिक निर्भरता और सदस्यों के पारस्परिकता के बीच अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
(4) कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता
👉दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं के बीच आम सहमति तक पहुंचना बहुत मुश्किल है क्योंकि उनकी राजनीतिक प्रणाली बहुत अलग है। उदाहरण के रूप में भारत में संघ संसदीय लोक प्रणाली हैं।भूटान में एक संवैधानिक राजतंत्र है और नेपाल में एक राजाशाही शासन प्रणाली है।
(5) आतंकवाद और चीन कारक
👉पाकिस्तान विभिन्न आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। और उसके लिए भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में बातचीत नहीं हो सकती। शक्तिकांत देशों ने भारत की इस बात का समर्थन किया। सार्क सम्मेलन के देश आज चीन की तरफ खिसने लगे हैं।
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Saturday, May 15, 2021
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन
ISA भारत द्वारा शुरू किया गया एक गठबंधन है जिसमें 120 से अधिक देश शामिल है और 18 जेसे देश फ्रेमवर्क समझौता में जुड़े हुए है। इस संगठन में अधिकांश सदस्य देश धूप वाले गर्म देश है। जो पूरी तरह या आंशिक रूप से मकर रेखा और कर्क रेखा के बीच स्थिर है।
भारत ने भविष्य में ऊर्जा जरूरतों को पूर्ण करने के लिए इसका शुभारंभ फ्रांस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी ने सयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन,30 नवंबर 2015 को COP21 के दौरान पेरिस, फ्रांस में संयुक्त रूप से किया था।
फ्रांस, इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को बढ़ाने के लिऐ 2022 तक 5600 करोड रुपए का फंड देगा जिससे सदस्य देशों में अन्य सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
क्या है सौर ऊर्जा
सूर्य से प्राप्त सूर्य किरणों को सौर ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा को विद्युत में बदलकर DC/AC पॉवर में लाया जाता है। सूर्य किरणों से प्राप्त उर्जा को DC/AC पॉवर में बदल ने के लिए सोलर पैनल की आवश्यकता होती है। सोलर पैनल में छोटे-छोटे सिलिकॉन के सेल लगे होते हैं। एस सेल के माध्यम से सूर्य ऊर्जा को ऊष्मा या विद्युत में बदला जाता है।
इस गठबंधन के उद्देश्य
इस वैश्विक गठबंधन का उद्देश्य स्थायी और ऊर्जा के व्यापक और तीव्र इस्तेमाल के माध्यम से पेरिस जलवायु समझौते के कार्यन्वयन में योगदान करना है।
दूसरा उद्देश्य 1000 गीगावोट से अधीक सौर ऊर्जा उत्पादन की वैश्विक क्षमत प्राप्त करना है। और 2030 तक सौर ऊर्जा निवेशन के लिए लगभग 1000 बिलियन डॉलर की रासी जुटना हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत की क्या भूमिका है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका सचिवालय भारत में गुरुग्राम (हरियाणा) में होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कद में बढ़ावा होगा।
भारत २०२२ तक भारत अपने ऊर्जा स्त्रोतों से 175 गीगावॉट बिजली का उत्पादन करेगा जिसमें 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा होगी(जो ISA के उद्देश्य का 10% होगा),60 गीगावॉट पवन ऊर्जा होगी, 10 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा होगी और 5 गीगावॉट जलविद्युत परियोजना से प्राप्त होगी।
फ्रेमवर्क समझौता में संशोधन
संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों राज्यों के लिए गठबंधन की सदस्य प्रदान करने के लिए 8 जनवरी, 2021 को ISA ने फ्रेमवर्क समझौता में संशोधन के बाद इतालवी गणराज्य ने ISA के फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। जो 17 मार्च,2021 को इटली ने भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिऐ हस्ताक्षर किए हैं।
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